शहडोल।जनसुनवाई केवल शिकायतों के निराकरण का मंच नहीं, बल्कि प्रशासन की मानवीय संवेदनाओं का आईना भी होती है। इसका भावुक और प्रेरणादायक उदाहरण मंगलवार को शहडोल जनसुनवाई में देखने को मिला, जब जनपद पंचायत गोहपारू के ग्राम बहेरहा निवासी दो मासूम भाई सुखनंदन और देवनंदन अपनी पीड़ा लेकर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के सामने पहुंचे।दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता का निधन हो चुका है और अब उनकी परवरिश उनकी बड़ी मां कर रही हैं, जो स्वयं नेत्र एवं पैर से दिव्यांग हैं। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि परिवार को दो वक्त के भोजन, कपड़े और बच्चों की पढ़ाई तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।मासूम बच्चों की दर्दभरी कहानी सुनकर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह भावुक हो उठे और उन्होंने तुरंत मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सहायता के निर्देश दिए।कलेक्टर ने तत्काल बच्चों को नए कपड़े उपलब्ध कराए और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि परिवार की खाद्यान्न पर्ची शीघ्र बनाई जाए, दोनों बच्चों की पढ़ाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा शासन की हर संभव जनकल्याणकारी योजना का लाभ प्राथमिकता के आधार पर दिलाया जाए।जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने भी कलेक्टर की इस संवेदनशील पहल की सराहना की। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच जरूरतमंद बच्चों के प्रति दिखाई गई यह संवेदनशीलता लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।डॉ. केदार सिंह की इस पहल ने यह संदेश दिया कि प्रशासन यदि संवेदनशील हो तो शासन की योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में वास्तविक सहारा बनकर पहुंचती हैं।
जनसुनवाई में दिखी कलेक्टर की संवेदनशीलता,अनाथ मासूमों को मिला सहारा
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