तीनों विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी विधायक फिर भी नहीं बची आदिवासियों की ज़मीन!

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शहडोल।आदिवासी बाहुल्य शहडोल संभाग के तीनों विधानसभा क्षेत्रों जयसिंहनगर,ब्यौहारी और बुढ़ार से आदिवासी विधायक चुने जाने के बावजूद आदिवासी समाज की ज़मीनें सुरक्षित नहीं रह सकीं।भूमाफिया, धनबल और प्रभावशाली लोगों ने सरकारी तंत्र की आंखों के सामने इन ज़मीनों पर अवैध कब्ज़ा कर महलों और शोरूमों का निर्माण कर लिया है।सूत्रों के अनुसार बुढ़ार-शहडोल हाईवे के किनारे आदिवासी परिवारों की पैतृक ज़मीनों पर महंगे कार शोरूम और व्यवसायिक इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। इन ज़मीनों पर सौदेबाज़ी और दबाव के जरिए रजिस्ट्री कराई गई, जबकि संबंधित प्रकरण एसडीएम न्यायालयों में विवादित हैं। फिर भी प्रभावशाली लोगों ने कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए निर्माण कार्य पूरा कर लिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आदिवासी विधायक होने के बावजूद उनके अपने समाज की ज़मीनें नहीं बच पा रहीं, तो यह व्यवस्था पर सवाल उठाता है। जनता अब प्रशासन से अपेक्षा कर रही है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और आदिवासियों की ज़मीनें वापस दिलाई जाएँ।

ब्यौहारी, जयसिंहनगर और जैतपुर (बुढ़ार)में भी इसी तरह के अतिक्रमण की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि समय रहते प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया तो आने वाले वर्षों में आदिवासियों की ज़मीनें पूरी तरह भूमाफियाओं के कब्जे में चली जाएँगी।

इनका कहना है।

शहडोल कलेक्टर डॉ.केदार सिंह ने बताया कि यदि किसी भी प्रकार से आदिवासी भूमि पर अवैध कब्ज़ा या निर्माण किया गया है तो उसकी जाँच राजस्व और पुलिस विभाग द्वारा की जाएगी। दोषी पाए जाने पर न केवल निर्माण ध्वस्त किया जाएगा बल्कि भूमि आदिवासी के नाम पर वापस दर्ज की जाएगी।किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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