शहडोल।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में 6 उत्सव प्रमुखता के साथ आयोजित किए जाते हैं जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना दिवस विजयदशमी उत्सव भी सम्मिलित है। लेकिन इस बार विजयदशमी को संघ अपना शताब्दी वर्ष पूर्ण कर रहा है। इसीलिए स्वयंसेवकों के द्वारा विजयदशमी के अवसर पर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 12 अक्टूबर को शहडोल नगर में स्थित तीन उपनगर के 14 बस्तियां के लगभग 1000 गणवेश धारी स्वयंसेवक के द्वारा रेलवे ग्राउंड में दोपहर 3 बजे एकत्रीकरण हुआ। जहां से गणेश धारी स्वयंसेवक पथ संचलन करते हुए रेलवे स्टेशन के सामने से दरभंगा चौक, बुढार चौक, गांधी चौक, पुराना गांधी चौक होते हुए रेलवे ग्राउंड में पथ संचलन समाप्त हुआ। गौरतलब है। पथ संचलन के दौरान दरभंगा चौक, कृष्णा होटल के पास, बुढार चौक, सूर्या होटल के सामने और न्यू गांधी चौक, जैन मंदिर के पास में स्वयंसेवकों के ऊपर पुष्प वर्षा करते हुए स्वयंसेवकों का विशेष रूप से स्वागत किया गया। वही शेर चौक पुराना गांधी चौराहा में सभी मुस्लिम समाज एवं वफ्फ बोर्ड के द्वारा स्वयंसेवकों का पुष्प वर्षा करते हुए विशेष स्वागत किया गया। गांधी चौक में रोटरी क्लब, तो गुरु नानक चौक में सिख समाज ने पुष्प वर्षा किया।


रेलवे ग्राउंड में पत्रकार दीर्घा, मातृशक्ति एवं आम गणमान्य जनों के लिए बैठक व्यवस्था के साथ अल्पाहार एवं पेयजल की व्यवस्था किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित विभिन्न प्रकार के साहित्य पुस्तकों के लिए एक साहित्य बिक्री केंद्र बनाया गया था। भारी पुलिस बल एवं सुरक्षा के बीच पूरे अनुशासन और समता के साथ गणवेश धारी स्वयंसेवको ने नगर में पथ संचलन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रिटायर्ड कैप्टन महेंद्र नापित मंच पर उपस्थित रहे वही कार्यक्रम के मुख्य वक्ता जुगराजधर द्विवेदी विशेष संपर्क प्रमुख मध्य क्षेत्र विश्व हिंदू परिषद रहे।

मुख्य वक्ता जुगराजधर द्विवेदी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने कैसे बाल्यावस्था में यूनियन झंडा को उखाड़ कर भगवा ध्वज फहराया कैसे बाल्यावस्था में अपने मित्रों के साथ मिलकर खेल-खेल में ही राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र निर्माण का बीज उस बच्चे के हृदय में आया। डॉक्टर साहब ने अपने जीवन को देश के हित में और देश के सांस्कृतिक सामाजिक उत्थान हिंदू राष्ट्र के लिए बलिदान कर दिया। डॉक्टर साहब की विरासत को आगे बढ़ाते हुए गुरुजी श्री माधव सदाशिव गोलवलकर ने संघ को विचारों से साहित्य से और ज्ञान से परिपूर्ण किया। डॉक्टर साहब और गुरुजी दोनों ने अपना पूरा जीवन मां भारती की सेवा में होम कर दिया। संघ ने 1925 से लेकर आज तक समाज कल्याण, शिक्षा, सेवा क्षेत्र में बहुत काम किया है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए विद्या भारती के माध्यम से सरस्वती शिशु मंदिर की संकल्पना प्रस्तुत किया जहां ज्ञान के साथ सनातन धर्म की संस्कृति ज्ञान और परंपरा को भी बच्चों में दिया जाता है ऐसे ही सेवा क्षेत्र में कई प्रकल्प उपचार के लिए हॉस्पिटल तथा गरीबों में भोजन की व्यवस्था, आपदा आपद काल में सहायता जैसे क्षेत्रों में संघ हमेशा बढ़-चढ़कर काम किया है। आज डॉक्टर साहब ने देश एवं हिंदू समाज के लिए जो दिया है। समाज उस ऋण से कभी ऋण मुक्त नहीं हो सकता है। आज ऐसे ही स्वयंसेवकों का त्याग तपस्या बलिदान इस स्थिति में पहुंच गया है की कोई हमें यदि आंख दिखाएगा तो उसका परिणाम ऑपरेशन सिंदूर जैसे माध्यम से मुंह तोड़ जवाब दिया जाता है आज भारत विश्व पटल पर एक कमजोर नहीं अपितु एक ताकतवर देश के रूप में उभर रहा है जो अपनी शर्तों अपनी नीतियों और अपने देश हित पर आगे बढ़ता है किसी के आगे झुकना आज संभव नहीं है।


पंच परिवर्तन समाज के लिए बेहद आवश्यक है। स्वदेशी के स्व का भाव राष्ट्र प्रथम के भाव को जगाता है और हमें आत्मनिर्भर बनाता है।समरसता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सभी हिंदुओं को सहोदर भाई मानता है। संघ की प्रतिज्ञा इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। कुटुंब प्रबोधन का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण रामायण में हमें देखने को मिलता है जहां भगवान राम लक्ष्मण और मां सीता और समस्त परिवार जनों ने परिवार में कटुता के भाव को त्यागते हुए सदा कुटुंब का भाव श्रेष्ठ माना। पर्यावरण संरक्षण एवं नागरिक कर्तव्य देश के परिवर्तन के लिए सबसे जरूरी है जिसे हम सभी को हर कार्य में और हर व्यवहार में अपनाना चाहिए।












