जिले में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ कलेक्टर का सख्त रुख एक बार फिर देखने को मिला है। ब्यौहारी तहसील से जुड़े रिश्वतखोरी के मामलों में कलेक्टर ने बिना किसी दबाव के बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए एसडीएम और तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से हटा दिया, जबकि संबंधित बाबू को बर्खास्त करने की बात सामने आई है।सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि द्वारा अधिकारियों के बचाव की कोशिश भी की गई, उसके बाद भी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश देते हुए सख्त कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासनिक हलकों में इस कदम को जवाबदेही और सुशासन की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
राहुल मिश्रा
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शहडोल।जिले में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ कलेक्टर द्वारा की गई सख्त कार्रवाई ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। ब्यौहारी तहसील में लगातार सामने आ रहे रिश्वतखोरी के मामलों और लोकायुक्त की कार्रवाइयों के बाद कलेक्टर ने त्वरित एवं कठोर कदम उठाते हुए ब्यौहारी एसडीएम भागीरथ लहरें और तहसीलदार राजकुमार कोल को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। वहीं मामले में संलिप्त पाए गए एक बाबू को बर्खास्त करने की तैयारी चल रही है।
कलेक्टर की इस कार्रवाई को जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और संवेदनशील प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इस कार्रवाई का उद्देश्य स्पष्ट संदेश देना है कि शासन-प्रशासन में रिश्वतखोरी,भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि अप्रैल माह में भी ब्यौहारी एसडीएम कार्यालय से जुड़े रिश्वतखोरी के मामले में लोकायुक्त ने एक बाबू को ट्रैप किया था।इसके बाद एक बार फिर ब्यौहारी तहसील कार्यालय में रिश्वतखोरी का मामला सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।
ताजा मामले में सहायक खंड लेखापाल लल्लू प्रजापति को लोकायुक्त की टीम ने कथित रूप से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता रमेश प्रसाद रजक पिता मंगल प्रसाद रजक,निवासी बाणसागर के सरकारी मकान से जुड़े प्रकरण को निपटाने तथा कब्जा हटाने के नाम पर आरोपी द्वारा सौदेबाजी की जा रही थी। बताया गया है कि आरोपी पूर्व में शिकायतकर्ता से 35 हजार रुपये एडवांस के रूप में ले चुका था। इसके बाद शेष 75 हजार रुपये की रिश्वत तहसील परिसर में लेते समय लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।बताया जाता है कि शिकायतकर्ता रमेश रजक,नगर परिषद खांड की उपाध्यक्ष सुधा रजक के पति हैं। लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।लगातार दूसरी बार सामने आए रिश्वतखोरी के मामलों के बाद कलेक्टर ने प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए बड़ा कदम उठाया। प्रशासनिक फेरबदल के तहत बुढ़ार तहसीलदार सुमित गुर्जर को ब्यौहारी तहसीलदार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में कलेक्टर की इस कार्रवाई की व्यापक चर्चा है। इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से जिले के शासकीय कार्यालयों में स्पष्ट संदेश गया है कि जनता से जुड़े मामलों में रिश्वतखोरी, लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को संरक्षण नहीं मिलेगा।सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में ऐसे मामलों की निगरानी और अधिक सख्ती से की जाएगी ताकि आमजन को पारदर्शी, जवाबदेह और निष्पक्ष प्रशासन मिल सके।
कलेक्टर की कार्यवाही का स्वागत

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कैलाश तिवारी ने कलेक्टर डॉ.केदार सिंह की कार्यवाही का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप पर व्यवहारी के एसडीएम एवं। तहसीलदार को हटाया है तथा लिपिक को बर्खास्त करने की कार्यवाही प्रस्तावित कर दी है।
ब्यौहारी का राजस्व विभाग भ्रष्टाचार का पर्यायवाची बन गया था करोड़ों रुपए की जमीनों का लेनदेन का प्रकरण पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय था।ऐसे में इस कार्रवाई से कुछ अंकुश लगेगा ऐसी आशा आम जनता को हुई है।
भाजपा नेता ने कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह से अपेक्षा की है कि इस प्रकार की कार्यवाही सभी एसडीएम एवं तहसील कार्यालय में जारी रखी जाए क्योंकि यही भ्रष्टाचार के केंद्र बने हुए हैं और आम जनता बहुत ज्यादा इससे त्रस्त हैं। जून माह में स्थानांतरण भी किया जाना प्रस्तावित है ऐसे में जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायतें हो उनको भी इसी समय हटाए जाए तो उचित रहेगा।


