बंगवार खदान हादसे में कार्रवाई तेज,2 अधिकारी सहित एक ओवरमैन निलंबित

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धनपुरी।एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र की बंगवार भूमिगत खदान में शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे हुए दर्दनाक रूफ फॉल हादसे के बाद जांच और प्रशासनिक कार्रवाई का दौर तेज हो गया है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए एसईसीएल मुख्यालय लगातार पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है और अधिकारियों से पल-पल की जानकारी प्राप्त की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
हादसे के बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी (डीजीएमएस), कोल इंडिया के जनरल मैनेजर (सेफ्टी) तथा एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त टीम लगातार घटनास्थल और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन और कार्यप्रणाली की बारीकी से समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में खान प्रबंधक घनाराम कुर्रे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा संवातन अधिकारी बाबूलाल विश्वकर्मा तथा सीनियर ओवरमैन रमाशंकर शुक्ल को भी निलंबन की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। वहीं सुरक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
 
 हादसे के बाद उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बंगवार खदान में हुए इस हादसे ने एक बार फिर खदानों में सुरक्षा व्यवस्थाओं और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रूफ फॉल की इस घटना में दो ठेका मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों का उपचार शहडोल के एक निजी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में जारी है। हादसे के बाद क्षेत्र में मजदूर संगठनों और स्थानीय लोगों के बीच सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। लगातार यह मांग उठ रही थी कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
जांच टीम द्वारा खदान के भीतर कार्यस्थल की परिस्थितियों, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और अधिकारियों की जिम्मेदारियों का परीक्षण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद और भी प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।
 मृतक परिवारों को सहायता, घायलों के उपचार पर विशेष ध्यान
सोहागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक बी.के. जेना इस पूरे मामले की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं। हादसे के 24 घंटे के भीतर ही मृतक मजदूरों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, जिससे प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत मिल सके। वहीं घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था भी प्रबंधन द्वारा सुनिश्चित की गई है।
महाप्रबंधक लगातार चिकित्सकों, अधिकारियों और जांच टीम से संपर्क बनाए हुए हैं तथा घायलों की स्थिति की जानकारी ले रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
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