शहडोल।बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों एक बार फिर बाघों की दुनिया चर्चा में है।खितौली क्षेत्र में D-1 बाघ का वर्चस्व लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। प्रसिद्ध बाघ पुजारी के दौर के बाद D-1 ने खितौली क्षेत्र में अपनी प्रभावशाली मौजूदगी दर्ज कराई है। उसकी दमदार कद-काठी,आक्रामक तेवर और क्षेत्रीय प्रभुत्व ने उसे पर्यटकों, गाइडों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया है।
खितौली का राजा कहा जाता है D-1
खितौली रेंजर स्वस्ति श्री जैन के अनुसार, D-1 को खितौली का राजा कहा जाता है। वह बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के प्रभावशाली और प्रभुत्वशाली नर बाघों में शामिल है। D-1 प्रसिद्ध बाघिन डॉटी का पुत्र है, जबकि उसके पिता के रूप में प्रभावशाली नर बाघ महामन का नाम लिया जाता है।
मजबूत वंश और प्रभावशाली शारीरिक बनावट ने D-1 को बांधवगढ़ के बाघों के बीच अलग पहचान दिलाई है। खितौली क्षेत्र में उसकी मौजूदगी अब पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गई है।
खितौली के साथ पनपथा और धमोखर में भी मूवमेंट
D-1 ने खितौली जोन में अपना क्षेत्र स्थापित किया है। अपने इलाके की सीमाओं को लेकर वह लगातार सक्रिय रहता है। वन्यजीव क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार उसका मूवमेंट खितौली के अलावा पनपथा और धमोखर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी देखा गया है।
पुजारी के साथ क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर हुए संघर्ष के बाद खितौली कोर टूरिज्म क्षेत्र सहित पनपथा-पचपेड़ी इलाके में D-1 की मौजूदगी और अधिक चर्चा में आई है।
पुजारी से संघर्ष ने बदल दी तस्वीर

बांधवगढ़ के प्रसिद्ध बाघ पुजारी को वन्यजीव प्रेमियों के बीच ‘जेंटलमैन ऑफ द जंगल’ के नाम से जाना जाता था। वहीं D-1 अपने आक्रामक और प्रभावशाली व्यवहार के लिए पहचाना जाता है। दोनों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष की स्थिति कई बार बनी।
मई 2026 में दोनों के बीच हुए संघर्ष के बाद बांधवगढ़ के बाघों की कहानी में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस संघर्ष में पुजारी गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। इसके बाद खितौली क्षेत्र में D-1 का प्रभाव और अधिक स्पष्ट नजर आने लगा।
विशाल कद-काठी बनी आकर्षण की वजह
D-1 अपनी विशाल और शक्तिशाली कद-काठी के लिए भी जाना जाता है। वन्यजीव क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार उसका वजन करीब 220 से 250 किलोग्राम के बीच माना जाता है। विशाल शरीर, निडर स्वभाव और प्रभावशाली चाल के कारण सफारी पर आने वाले पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों में उसे देखने की खास उत्सुकता रहती है।
पुजारी के बाद D-1 के नाम नया अध्याय
पुजारी की मौत के साथ खितौली क्षेत्र में एक चर्चित बाघ के दौर का अंत हुआ, तो दूसरी ओर D-1 के बढ़ते वर्चस्व ने बांधवगढ़ की बाघ गाथा में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है।
नेचुरलिस्ट सुनील यादव के अनुसार, D-1 वर्तमान में बांधवगढ़ के लोकप्रिय बाघों में शामिल है। पुजारी के साथ हुए संघर्ष के बाद पर्यटकों के बीच उसे देखने की उत्सुकता और बढ़ी है।
बांधवगढ़ आने वाले पर्यटकों के लिए अब D-1 उन प्रमुख बाघों में शामिल हो गया है, जिसकी एक झलक पाने के लिए सफारी के दौरान खास नजरें टिकी रहती हैं। खितौली में उसका बढ़ता दबदबा और प्रभावशाली व्यक्तित्व उसे बांधवगढ़ के चर्चित बाघों की कतार में खास मुकाम दिला रहा है।

