बांधवगढ़ में संरक्षण चुनौतियों और जिम्मेदार पर्यावरणीय रिपोर्टिंग पर मीडिया कार्यशाला

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बांधवगढ़।वन्यजीव संरक्षण,पर्यावरणीय चुनौतियों और जिम्मेदार पत्रकारिता को लेकर वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर WWF-India द्वारा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व एमपीटी में विशेष मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पत्रकारों को संरक्षण से जुड़े स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ देने के साथ पर्यावरण एवं वन्यजीवों से संबंधित खबरों में तथ्यपरक, संतुलित, संवेदनशील और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना रहा।
कार्यशाला में बांधवगढ़ सहित आसपास के जिलों से आए पत्रकारों ने सहभागिता की। दैनिक भास्कर, नई दुनिया, पत्रिका,विजयमत, PTI, ETV भारत,आज तक और बंसल न्यूज सहित राष्ट्रीय एवं स्थानीय मीडिया संस्थानों के 26 पत्रकारों ने वन अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ विभिन्न सत्रों में संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।


कार्यशाला में वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियां, कॉरिडोर कनेक्टिविटी का महत्व, हाथी कॉरिडोर, मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व, संरक्षण की कार्यप्रणालियां और जमीनी स्तर की चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी गई। पत्रकारों को बताया गया कि पर्यावरण एवं वन्यजीव से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय तथ्यों की पुष्टि, संतुलित दृष्टिकोण और संवेदनशील भाषा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।वन्यजीवों को अपराधी नहीं,समस्या के हिस्से के रूप में समझें


WWF-India की हेड-कंजर्वेशन पार्टनरशिप्स नेहा सिन्हा ने कहा कि मीडिया में प्रकाशित किसी खबर का स्वर लोगों की सोच और नीतियों को प्रभावित कर सकता है। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रिपोर्टिंग करते समय केवल वन्यजीवों को दोषी ठहराने के बजाय संघर्ष के वास्तविक कारणों और संभावित समाधानों पर भी खोजपरक रिपोर्टिंग की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों और वन्यजीवों दोनों के प्रति संवेदनशील रहते हुए तथ्यपरक पत्रकारिता की जा सकती है।
बांधवगढ़ की खबरों में पारदर्शिता जरूरी


बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप निदेशक योहान कटारा ने मीडिया के लिए इस तरह की कार्यशाला आयोजित करने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि बांधवगढ़ से संबंधित मीडिया कवरेज सामान्यतः रचनात्मक और सकारात्मक रहती है। बांधवगढ़ एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के साथ जैव विविधता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, ऐसे में संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रभावी प्रबंधन भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि रिजर्व में होने वाली घटनाओं को लेकर पारदर्शिता बरती जाती है और उम्मीद है कि पत्रकार संरक्षण केंद्रित एवं तथ्यात्मक कहानियों को समाज के सामने लाएंगे।
कानून के पालन में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण


दैनिक भास्कर के हरिकृष्ण दुबौलिया ने कहा कि बांधवगढ़ मध्यप्रदेश में बाघों की महत्वपूर्ण आबादी वाला क्षेत्र होने के साथ जैव विविधता से भी समृद्ध है। बढ़ती बाघ आबादी, मानवीय गतिविधियों और व्यावसायिक दबाव के बीच मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर चुनौती बन रहा है। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी है कि पर्यावरण और वन्यजीव कानूनों के पालन से जुड़े मामलों को तथ्यों और संवेदनशीलता के साथ सामने लाया जाए।
कार्यशाला के दौरान WWF-India की टीम ने संरक्षण संचार में नैतिक मानकों और बेहतर कार्यप्रणालियों की जानकारी भी दी। चर्चा में इस बात पर जोर रहा कि मीडिया केवल घटनाओं की सूचना देने तक सीमित न रहे, बल्कि जंगल, वन्यजीव, स्थानीय समुदाय और पर्यावरण से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी सामने लाए।
कार्यशाला का समापन वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता तथा तथ्यपरक, संतुलित और जिम्मेदार पर्यावरणीय पत्रकारिता को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ हुआ।

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